Sourabh Malviya डॉ.सौरभ मालवीय
विचारों की धरा पर शब्दों की अभिव्यक्ति...
Thursday, March 19, 2026
पुस्तक भेंट
आज हिंदू नव वर्ष का पहला दिन है। चैत्र नवरात्रि का पहला दिन भी है।
इस शुभ अवसर पर लखनऊ यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के HOD डॉ. सौरभ मालवीय सर से मुलाकात हुई। उनका स्नेह और मार्गदर्शन हमेशा सकारात्मक ऊर्जा देता है। हर मुलाकात कुछ नया सिखाती है। और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक 'अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश' भेंट की।
संदीप सिंह
नववर्ष विक्रम संवत एवं चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
भारतीय सांस्कृतिक गौरव की स्मृतियाँ समेटे हुए नव संवत्सर (विक्रम संवत-२०८३) के शुभारंभ के पावन अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने श्री अयोध्या धाम में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना कर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन-पूजन किए।यह दिव्य आयोजन राष्ट्र के आध्यात्मिक उत्थान, लोककल्याण एवं सनातन सांस्कृतिक चेतना को नवीन ऊर्जा प्रदान करने वाला है।
नववर्ष विक्रम संवत २०८३ एवं चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
Wednesday, March 18, 2026
टीवी पर लाइव
मोदी सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की संकल्पना के साथ देश को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों—गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित समुदाय—को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है।
सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल सेवाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के माध्यम से “विकसित भारत” का लक्ष्य रखा है। साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और रोजगार के क्षेत्रों में सुधार के प्रयास बहुत तेज गति से हो रहा.
साहित्य हमें समृद्ध करता है : डॉ. सौरभ मालवीय
लखनऊ। साहित्यिक गरिमा और सांस्कृतिक उत्साह के बीच लेखक मनीष शुक्ला की पुस्तक “अफसाना लिख रहा हूँ” का भव्य विमोचन समारोह आज लखनऊ पुस्तक मेला, रविंद्रालय में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सौरभ मालवीय ने की, मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री अनुपमा जायसवाल जी उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में ललित कला के उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्रा एवं नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि साहित्य हमें समृद्ध करता है। साहित्य ही जीवन है और जीवन ही साहित्य है। उन्होंने कहा कि “भारत” शब्द का अर्थ ही प्रकाश, उजाला और ज्ञान है, जिसका बोध साहित्य के माध्यम से ही संभव होता है।
मुख्य अतिथि अनुपमा जायसवाल ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति अत्यंत अभिनंदनीय है और पाठकों को एक नई दृष्टि प्रदान करेगी।
इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने भी लेखक मनीष शुक्ला के प्रयासों की प्रशंसा की और पुस्तक को समाज के लिए उपयोगी बताया।
कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों एवं बड़ी संख्या में पाठकों की उपस्थिति रही, जिससे वातावरण साहित्यिक उत्साह से ओत-प्रोत रहा।
Tuesday, March 17, 2026
सकारात्मक सोच
सुप्रभात!
सकारात्मक सोच वास्तव में जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है।
जब व्यक्ति सकारात्मक रहता है, तो उसके भीतर ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहता है। इससे कार्य करने की गति भी बनी रहती है, मन प्रसन्न रहता है और स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है। यही सकारात्मकता आगे चलकर लोकमंगल की भावना को भी प्रबल बनाती है, जिससे व्यक्ति केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी उपयोगी बनता है।
सकारात्मक सोच ही सफलता, स्वास्थ्य और समाजसेवा का मूल आधार है।
Monday, March 16, 2026
क्षेत्रीय शिशु वाटिका समीक्षा एवं योजना बैठक
दिनांक-14-03-2026 से 15-03-2026 तक
सरस्वती बालिका विद्यालय सूर्यकुंड गोरखपुर में संपन्न हुई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ सौरभ मालवीय (क्षेत्रीय मंत्री विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश), माननीय विजय उपाध्याय (संयोजक शिशु वाटिका), माननीय शैलेश सिंह जी (प्रांत मंत्री गोरक्ष प्रांत), श्री राम सिंह जी (शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के प्रदेश निरीक्षक), श्रीमती हीरा सिंह (सह क्षेत्रीय शिशु वाटिका प्रमुख) डाॅ. नीना अस्थाना (मंत्री,सरस्वती बालिका विद्यालय सूर्यकुण्ड गोरखपुर) तथा विभिन्न क्षेत्रों की शिशु वाटिका प्रमुख उपस्थिति रहीं।
मुख्य अतिथि सौरभ मालवीय जी ने शिशु वाटिका प्रांत प्रमुख एवं सह प्रांत प्रमुख बहनों से सीधा संवाद स्थापित करते हुए उनके क्षेत्रीय प्रांतीय एवं विद्यालय की शिशु वाटिका में उनके दायित्वों के क्रियान्वयन, बच्चों की गतिविधियों के विवरणों पर विस्तृत समीक्षा की तथा उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत शिशु वाटिका में कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने नवीन सत्र के लिए शिशु वाटिका के विभिन्न दायित्वों एवं कार्य बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में शैलेश सिंह जी ने कहा कि शिशु वाटिका का आधार वाल्मीकि आश्रम शिक्षा पद्धति होना चाहिए तथा भरत, लव-कुश जैसे श्रेष्ठ बालकों का निर्माण होना चाहिए ,जिससे श्रेष्ठ समाज का निर्माण हो.
कार्यक्रम का समापन आभारज्ञापन एवं शांति मंत्र से हुआ।
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हिंदू सनातन नववर्ष विक्रम संवत २०८३ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं! यह पावन नववर्ष समस्त सनातन समाज के लिए नई ऊर्...
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डॉ. सौरभ मालवीय मनुष्य जिस तीव्र गति से उन्नति कर रहा है, उसी गति से उसके संबंध पीछे छूटते जा रहे हैं. भौतिक सुख-सुविधाओं की बढ़ती इच्छाओं क...




























