पाँच वर्ष पुरानी ऐतिहासिक स्मृति!
Sourabh Malviya डॉ.सौरभ मालवीय
विचारों की धरा पर शब्दों की अभिव्यक्ति...
Thursday, October 29, 2026
Wednesday, October 28, 2026
टीवी पर लाइव
बैलेट पेपर से चुनाव, फिर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला!
28 सीटों पर हुए MLC चुनाव में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलना विपक्ष की राजनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोकतंत्र में जनता और मतदाताओं के निर्णय का सम्मान करना चाहिए, न कि अपनी राजनीतिक विफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ना चाहिए।
लोकतंत्र को कमजोर करने के प्रयासों से नहीं, बल्कि जनादेश का सम्मान करने से लोकतंत्र मजबूत होता है।
जनता सब देख रही है, सब समझ रही है। लोकतंत्र में अंततः जनता का विश्वास और मतदाताओं का निर्णय ही सबसे बड़ा प्रमाण है।
Sunday, October 25, 2026
डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का लोकार्पण
भारतीय ज्ञान परम्परा के माध्यम से राष्ट्रबोध जागृत करने का सशक्त प्रयास है पुस्तक
वाराणसी। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूटीसीई) एवं अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, विद्या भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय ज्ञान परम्परा कार्यक्रम में डॉ. सौरभ मालवीय द्वारा लिखित पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का लोकार्पण किया गया। पुस्तक में भारतीय संस्कृति, पर्यावरण, भारतीय महापुरुषों के जीवन-दर्शन तथा समसामयिक विषयों पर आधारित लेखों का संकलन है।
पुस्तक के माध्यम से लेखक ने भारतीय ज्ञान परम्परा, सांस्कृतिक चेतना, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रबोध के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया है। पुस्तक का मूल भाव आत्मबोध के माध्यम से राष्ट्रबोध की भावना को सशक्त करना तथा भारतीय जीवन-दृष्टि के प्रति समाज में जागरूकता उत्पन्न करना है।
लोकार्पण कार्यक्रम में केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी, विद्या भारती के अध्यक्ष प्रो. रविंद्र कान्हेरे, विद्या भारती के उपाध्यक्ष अवनीश भटनागर, अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूटीसीई) के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह तथा विद्या भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री गोविंद चरण महंत सहित अनेक शिक्षाविद्, विद्वान एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संवर्धन तथा शिक्षा के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर विशेष बल दिया गया। पुस्तक का लोकार्पण भारतीय चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध से जुड़े साहित्य के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
Saturday, October 24, 2026
दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला सम्पन्न.
काशी, 25 अक्टूबर। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूटीसीई) एवं अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, विद्या भारती के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परम्परा की पुनर्प्रतिष्ठा’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का समापन हुआ। 24 एवं 25 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से आए 70 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। सात सत्रों में भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयामों, उसकी समकालीन प्रासंगिकता तथा शिक्षा व्यवस्था में उसके समुचित समावेश को लेकर व्यापक विचार-विमर्श एवं मंथन किया गया।
कार्यशाला में गोविन्द चरण महंत, अवनीश भटनागर, रविन्द्र कान्हेरे, डी. रामकृष्ण, डॉ. प्रदीप जायसवाल, हेमचंद्र, पवन तिवारी तथा डॉ. सौरभ मालवीय सहित विभिन्न विद्वानों एवं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों की सहभागिता रही।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध विरासत को समकालीन संदर्भों में पुनर्स्थापित करना तथा भारतीय शिक्षा व्यवस्था को देश की सांस्कृतिक चेतना, जीवन-दृष्टि, दर्शन और ज्ञान-संपदा से जोड़ना रहा। विभिन्न सत्रों में भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण की आवश्यकता पर विचार किया गया।
दो दिवसीय कार्यशाला ने भारतीय ज्ञान परम्परा को शिक्षा के केंद्र में स्थापित करने तथा भारतीय दृष्टि पर आधारित ज्ञान-विमर्श को व्यापक बनाने की दिशा में सार्थक संवाद का अवसर प्रदान किया।
Thursday, October 22, 2026
जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं देश के माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आप स्वस्थ, दीर्घायु एवं ऊर्जावान रहें तथा राष्ट्रसेवा के अपने संकल्प के साथ माँ भारती की सेवा कर@ते हुए देश की उन्नति एवं जनकल्याण में निरंतर योगदान देते रहें।
सादर शुभकामनाएँ!
Tuesday, October 20, 2026
शुभ विजयादशमी
शुभ विजयादशमी
असत्य पर सत्य की विजय,
अधर्म पर धर्म की विजय,
अहंकार पर विनम्रता की विजय और
बुराई पर अच्छाई की विजय का महापर्व है विजयादशमी।
आइए, इस पावन अवसर पर संस्कार, सदाचार एवं राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने और समाज में सकारात्मकता, सद्भाव तथा राष्ट्रनिष्ठा का भाव सुदृढ़ करने का संकल्प लें।
🙏 आपको एवं आपके समस्त परिवार को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
🚩 धर्म की विजय हो, सत्य की प्रतिष्ठा हो, राष्ट्र का कल्याण हो।
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डॉ. सौरभ मालवीय ‘नारी’ इस शब्द में इतनी ऊर्जा है कि इसका उच्चारण ही मन-मस्तक को झंकृत कर देता है, इसके पर्यायी शब्द स्त्री, भामिनी, कान...
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डॉ. सौरभ मालवीय किसी भी देश के लिए एक विधान की आवश्यकता होती है। देश के विधान को संविधान कहा जाता है। यह अधिनियमों का संग्रह है। भारत के संव...







































