Monday, May 4, 2026

प्रस्तावना : शब्द साधक अटलजी, हमारे अटलजी

 

भारत की राजनीति में अपने चरित्र, ध्येयनिष्ठा, राष्ट्र के प्रति समर्पण, सहिष्णुता, शब्दसाधक,  मिलनसारिता, सहजता, सरलता और गरिमा आदि गुणों से परिपूर्ण व्यक्तित्व वाले श्री अटल बिहारी  वाजपेयी को केवल लेखनी की सीमा में रख पाना बड़ा दुष्कर है। वे बहुआयामी व्यक्तित्व के शाश्वत स्वरूप हैं, जिनको पाकर भारतीय राजनीति धन्य हुई है। उनके विराट मानस पटल में राजनेता केवल एक विभाग भर है, वे मूलतः समाजनेता हैं, जिनका उद्देश्य भारत को परम वैभव के शिखर पर आरूढ़ करना है। वे भारतीय संस्कृति के ऋषि प्रेषित प्रवक्ता हैं, जो समाज में भारद्वाज, अत्रि, याज्ञवल्य, पाराशर, पतंजलि, भृगु आदि की परंपरा को चिरस्थायी स्वरूप देने हेतु कटिबद्ध है, वे आध्यात्म और विज्ञान के सेतु हैं। अटलजी प्रखर वक्ता हैं। उनकी शैली मोहिनी है, हृदय संवेदनाओं से भरा हुआ है, उनकी कविताओं में समष्टि से व्यक्ति तक के विचार समाहित रहते हैं। अटलजी के लेखों में राष्ट्र और राष्ट्रवाद जीवंत रूप में दर्शनीय है। भारत की संस्कृति, सभ्यता, राजधर्म, राजनीति और विदेश नीति आदि विषयों पर अटलजी की लेखनी सभी के लिए प्रेरक है। उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया। ऐसे व्यक्तित्व पर लिखना सचमुच कठिन है। कितना भी प्रयास करें, बहुत कुछ उल्लेख में शेष रह जाएगा। उनकी लेखनी धन्य है। मैंने इस पुस्तक के माध्यम से अटलजी के पत्रकारीय जीवन को संजोने का एक छोटा सा प्रयास किया है। आशा करता हूं कि राष्ट्र की युवा पीढ़ी अटलजी के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर उनके सपनों के अनुरूप भारत के नव निर्माण का प्रयत्न करेगी।  
 -डॉ. सौरभ मालवीय


(पुस्तक- 'राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी' से)

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पश्चिम बंगाल
 जय श्रीराम

Sunday, May 3, 2026

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पश्चिम बंगाल में राष्ट्रवाद का शंखनाद गूंज उठा है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्वप्न साकार होने की ओर है।
भाजपा की सरकार—जय बंगाल, वन्दे मातरम्, जय श्रीराम!

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 4 मई दीदी गयी
वन्देमातरम 

विद्या भारती की बालिका शिक्षा समीक्षा बैठक सम्पन्न





लखनऊ। विद्या भारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित बालिका शिक्षा की समीक्षा बैठक निराला नगर, लखनऊ में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक में क्षेत्र के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा करते हुए बालिका शिक्षा के विस्तार, गुणवत्ता और प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि “सर्व समाज के लिए शिक्षा सुनिश्चित करना तथा नारी शक्ति के जागरण हेतु बालिका शिक्षा को केन्द्र में रखना हमारा प्रमुख उद्देश्य है।” उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा केवल सामाजिक परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
बैठक में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास, संस्कारयुक्त शिक्षा, तथा समाज में उनके नेतृत्वकारी योगदान को बढ़ाने के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, विद्यालय स्तर पर चल रही योजनाओं की समीक्षा कर उन्हें और प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर रेखा चूड़ासमा एवं उमाशंकर मिश्र जी विशेष रूप से उपस्थित रहे और अपने विचारों से बैठक को समृद्ध किया।

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 “लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि होता है।
ममता सरकार की अब अंतिम शाम है—4 मई को बदलाव तय है, दीदी की विदाई निश्चित है।”
4 मई को बंगाल में परिवर्तन का सूर्योदय होगा। 

Friday, May 1, 2026

भारत केंद्रित शिक्षा से ही बनेगा दिव्य और भव्य भारत: डॉ. सौरभ मालवीय










फर्रुखाबाद। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, श्याम नगर फर्रुखाबाद में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के तत्वावधान में आयोजित ‘प्रधानाचार्य कार्य योजना बैठक’ के समापन सत्र में क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने स्वदेश केंद्रित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा पूरी तरह से स्वदेशी मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए, तभी हम एक दिव्य और भव्य भारत का निर्माण कर सकते हैं।

डॉ. मालवीय ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही शिक्षण संस्थानों का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए, क्योंकि विद्या भारती का वास्तविक आधार समाज ही है। उन्होंने विद्या भारती की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान में देशभर में संस्था के लगभग 25 हजार विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें 1.5 लाख से अधिक आचार्य एवं लाखों छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। साथ ही, संस्था के पूर्व छात्र विश्व के 85 देशों में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, जो इसकी वैश्विक पहचान को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों की परतंत्रता के बावजूद भारत की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक चेतना अक्षुण्ण बनी हुई है। अनेक आक्रांताओं के प्रयासों के बावजूद भारतीय विचारधारा आज भी सशक्त है, जिसका मूल आधार हमारे शास्त्र हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे एक सक्षम, समर्थ और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रधानाचार्य सम्मानित
इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रधानाचार्यों को अंगवस्त्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में श्री राघवेन्द्र पाण्डेय, प्रियंका सिंह, श्री गजेन्द्र सिंह, श्री सोमेश जी, श्री विक्रम बहादुर सिंह, श्री अनिल कुमार मिश्र एवं श्री नवीन कुमार अवस्थी प्रमुख रहे।

प्रधानाचार्य ही विद्यालय की पहचान
डॉ. मालवीय ने कहा कि एक प्रधानाचार्य ही विद्यालय की पहचान, गरिमा और प्रतिष्ठा का केंद्र होता है। उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, समर्पण और विश्वास के साथ करना चाहिए।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्री रत्नेश अवस्थी (प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दामोदर नगर) द्वारा किया गया। अंत में संभाग निरीक्षक श्री शिव करन जी ने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
-रामानुज अग्निहोत्री
मीडिया प्रभारी

प्रस्तावना : शब्द साधक अटलजी, हमारे अटलजी

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